Microsoft
success story
![]() |
Microsoft |
बिल गेट्स के कुशल नियंत्रण में स्थापना के 33 साल बाद आज Microsoft एक ऐसे आधार पर खड़ी है जिस पर नयी सदी की नयी इबारत लिखी जा रही है।
गर्व का विषय है की Microsoft की सफलता मे भारत की आई टी प्रतिभाओ का भी अहम योगदान है।
Microsoft ने भारत मे आई टी के बाज़ार मे मात्र 20 कर्मचारियों के स्टाफ के साथ दस्तक दी थी , और आज कंपनी के पास 1200 से ज़्यादा आई टी प्रोफेशनल की टीम है , जो 50 से ज़्यादा प्रॉडक्ट्स बनाती है।
Microsoft के संस्थापक बिल गेट्स के बारे मे यह भी कहा जाता है की वे हर सेकेंड मे 250 डॉलर हर दिन मे 2 करोड़ डॉलर और हर साल करीब 8 अरब डॉलर कमाते है।
यदि बिल गेट्स एक देश का नाम होता तो वह दुनिया का 37 वा सबसे अमिर देश होता।
तो चलिए देखते है कैसे झूठ से शुरू हुई थी Microsoft?
1975 के एक दिन एम आई टी एस नाम की एक तकनीकी कंपनी मे दो अजनबी युवक घुसे संतरी ने रोका तो उन्होने बोला की कंपनी के मलिक ने बुलाया है, कुछ ही देर मे दोनों कंपनी के मालिक के साथ बैठे और मुलाकात का मुदा था एम आई टी एस के बनाए नये माइक्रो कंप्यूटर आल्टेयर AA00 के लिए ओइपेराटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर बनाने का।
इन दोनों युवको ने ऐसा कहा की उन्होंने यह सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया है और वे उसे बेचना चाहते है . यह तो आई एम टी एस के लिए बहुत ही अच्छी बात थी। क्योंकि ये दुनिया का पहला माइक्रो कंप्यूटर था।
लेकिन इसे चलानेवाला कोई बेसिक प्रोग्राम नही बन सका था , कंपनी ने सौदा किया और आठ हप्ते का समय दिया , असलियत यह थी की न तो उन्होंने आल्टेयर पर काम किया था और ना ही उनके पास ऐसा कोई प्रोग्राम था
और ये दोनो युवक और कोई नही बल्कि बिल गेट्स और पॉल एलन थे , और यही कोरा झूठ आगे चलकर सच मे बदला और Microsoft कॉर्पोरेशन की बुनियाद का कारण बना।
आठ हप्ते मे बिल और एलन ने रात दिन एक करके एक बेसिक प्रोग्राम बना लिया और आल्टेयर को चला दिया , बस यहीं से शुरू होती है Microsoft की कहानी।
जो दो कमरो के दफ़्तर से शुरू हुई और आज दुनिया के 150 देशों के सैकड़ों आलीशान दफ़्तरो से बया हो रही है।
Microsoft नाम क्यू रखा गया?
क्योंकी उनका लक्ष्य माइक्रो कंप्यूटर कीट के लिए प्रोग्राम बनाना था।
कंप्यूटर के इतने दीवाने बिल ने हावर्ड यूनिवर्सिटी की अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ दी थी।
आज वे दुनिया के सबसे अमीर नोंन ग्रैजुएट कहे जाते है।
1980 के दौर मे दुनिया मे आई बी एम कंपनी की अगवाई मे पीसी क्रांति आ रही थी ऐसे में नये कंप्यूटर को चलाने के लिए एक ऐसे सरल ऑपरेटिंग सिस्टम की ज़रूरत थी.जिसे एक्सपर्ट के साथ साथ एक सामान्य आदमी थी चला सके . आई बी एम ने बिल की कंपनी से संपर्क किया लेकिन नयी तरकीब भीड़ाते हुए बिल ने उन्हे डिजिटल रिसर्च नाम की कंपनी का सुझाव दिया।
ऐसा करने का कारण था फिर से उतना समय मिल जाए जीतने मे आई बी एम के लायक प्रोग्राम बन जाए . आई बी एम और डिजिटल रिसर्च के बीच सौदा नही हो सका
आई बी एम फिर से बिल की शरण मे आया अब वे तैयार थे उन्होने 86 डोस के रूप मे नया ऑपरेटिंग सिस्टम पेश किया जो आगे चलकर एमेस डोस के रूप मे मशहूर हुआ
इसे उन्होंने 80,000 डॉलर में आई बी एम को बेचा लेकिन कॉपीराइट अपने पास रखे , यह एक नया पेतरा था जिसने आगे चल कर Microsoft को नंबर 1 बना दिया।
इसके बाद Microsoft ने विंडोस उतारा जो ऐसा शानदार सॉफ्टवेयर सिद्ध हुआ की कंप्यूटर मे जाकने की एकमात्र खिड़की आजतक बना हुआ है।
सॉफ्टवेर कारोबार मे मोनोपोली और दबदबा कायम रखने के लिए , माइक्रोसॉफ्ट ने अमेरिकी और यूरोपियन सरकार के साथ लंबी क़ानूनी लड़ाइया लड़ी इसके लिए Microsoft को करोड़ो डॉलर का जुर्माना भी भरना पड़ा
यह दुनिया की पहेली व एकमात्र एसी कंपनी है जिसके पास 12000 से ज़्यादा अरबपति कर्मचारी है।
तो दोस्तों ये थी पूरी कहानी Microsoft की।आपको यह कहानी कैसी लगी हमें कमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके जरुर बताएं।
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें
If you have any doubts please let me know